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Compliance

UPPCB तृतीय-पक्ष प्रमाणन 2026: Orange और Green उद्योगों के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शिका

UPPCB के वैकल्पिक प्रमाणन की पात्रता, रिपोर्ट और नमूना जाँच की शर्तें तथा 2026 में आवेदन से पहले जरूरी पुष्टि।

लेखक: Testa & Tegmenप्रकाशित: 13 मिनट
विषय सूची
  1. 2025 के आदेश ने क्या व्यवस्था बनाई?
  2. पात्रता की जाँच में पहले अपवाद देखें
  3. सूची में नाम और वर्तमान नियुक्ति अलग बातें हैं
  4. उद्योग और संस्था की जिम्मेदारियाँ अलग हैं
  5. नमूनों की जाँच कहाँ होगी, पहले तय करें
  6. दस और बीस दिन का अर्थ क्या है?
  7. छह महीने की वैधता निरीक्षण से शुरू होती है
  8. शुल्क और नियामक नियंत्रण अलग रखें
  9. जनवरी 2026 के बदलाव क्यों जरूरी हैं?
  10. वर्तमान पोर्टल की सूचना पढ़कर आवेदन करें
  11. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
  12. 1. क्या Orange और Green उद्योगों के लिए यह प्रमाणन अनिवार्य है?
  13. 2. कारण बताओ नोटिस वाली इकाई इस सुविधा का उपयोग कर सकती है?
  14. 3. क्या तृतीय-पक्ष रिपोर्ट संचालन की अनुमति है?
  15. 4. क्या नमूने किसी भी मान्य बाहरी प्रयोगशाला में भेज सकते हैं?
  16. 5. क्या दस या बीस दिन में स्वीकृति की गारंटी है?
  17. 6. रिपोर्ट की छह महीने की वैधता कब शुरू होती है?
  18. 7. तृतीय-पक्ष रिपोर्ट के बाद भी UPPCB निरीक्षण कर सकता है?
  19. मूल दस्तावेज: PDF और आधिकारिक पोर्टल

मुख्य बातें

किसके लिए: उत्तर प्रदेश के उद्योग प्रस्तावक, अनुपालन दल, पर्यावरण पेशेवर और विद्यार्थी

  • प्रमाणन वैकल्पिक है; श्रेणी के साथ सभी अपवाद और पात्रता जाँचें।
  • संस्था की सक्रिय UPPCB व्यवस्था और अपनी प्रयोगशाला की शर्त की पुष्टि करें।
  • दस/बीस दिन रिपोर्ट की अवधि हैं; छह महीने निरीक्षण से शुरू होते हैं।
  • राज्य SOP के साथ 2026 के सहमति संशोधन और वर्तमान निवेश मित्र निर्देश पढ़ें।

उत्तर प्रदेश में Orange या Green श्रेणी का उद्योग अपनी सहमति के आवेदन में तृतीय-पक्ष प्रमाणन रिपोर्ट का उपयोग कर सकता है। पात्र मामलों में इससे उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, यानी UPPCB, के अधिकारियों के सामान्य भौतिक निरीक्षण के स्थान पर संस्था की सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर आवेदन आगे बढ़ता है। 7 नवंबर 2025 के आदेश के साथ जारी प्रक्रिया का यही उद्देश्य है।

यह विकल्प है, हर उद्योग के लिए अनिवार्य व्यवस्था नहीं। इसकी अपनी पात्रता, अपवाद और स्थल पर जाँच की जरूरत है। प्रमाणन रिपोर्ट मिलने का अर्थ स्थापना या संचालन की अनुमति मिलना नहीं है। UPPCB आदेश और SOP, खंड 1 तथा 11।

अक्टूबर 2026 में यह विकल्प चुनते समय सवाल केवल रिपोर्ट के शुल्क का नहीं है। पहले देखें कि इकाई पात्र है या नहीं, संस्था का वर्तमान प्राधिकरण क्या है, नमूनों की जाँच कहाँ होगी और आवेदन जमा करते समय रिपोर्ट वैध रहेगी या नहीं। जनवरी 2026 के केंद्रीय सहमति संशोधन तथा निवेश मित्र की वर्तमान सूचना भी साथ पढ़नी होगी।

इन दस्तावेजों की भूमिका अलग रखना उपयोगी है।

2025 के आदेश ने क्या व्यवस्था बनाई?

UPPCB के हस्ताक्षरित आदेश में 3 नवंबर 2025 के बोर्ड निर्णय का संदर्भ है और साथ में मानक संचालन प्रक्रिया, यानी Standard Operating Procedure (SOP), संलग्न है। दिया गया सात पृष्ठों का दस्तावेज वही संलग्न प्रक्रिया है। बोर्ड की आधिकारिक डाउनलोड प्रति में आदेश का प्रारंभिक पृष्ठ भी है। आदेश की तारीख और वेबसाइट पर अपलोड किए गए दस्तावेज के नाम में लिखी बाद की तारीख को एक न समझें।

प्रक्रिया केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, यानी CPCB, के वर्गीकरण वाले Orange और Green उद्योगों तथा परियोजनाओं से संबंधित है। इसमें स्थापना की सहमति (CTE), संचालन की सहमति (CTO) और संचालन तथा प्राधिकार की समेकित सहमति (CCA) के आवेदन आते हैं। सूचीबद्ध तृतीय-पक्ष संस्था (TPI) अनुपालन की जाँच करके संबंधित रिपोर्ट देती है। आवेदन पर कार्यवाही UPPCB करता है।

सामान्य आवेदन मार्ग उपलब्ध रहता है। इसलिए विकल्प चुनने से पहले पात्रता, अपने रिकॉर्ड की तैयारी और संस्था की क्षमता की तुलना करें। केवल इस सुविधा के उपलब्ध होने से हर पात्र उद्योग के लिए अलग प्रमाणन रिपोर्ट खरीदना जरूरी नहीं हो जाता।

पात्रता की जाँच में पहले अपवाद देखें

Orange या Green श्रेणी होना शुरुआत है, पूरी पात्रता नहीं। खंड 10 में UPPCB या CPCB के कारण बताओ अथवा बंदी आदेश के अधीन उद्योगों को बाहर रखा गया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण, उच्च न्यायालय या अन्य न्यायिक निकाय में लंबित मामले, लंबित पर्यावरणीय उल्लंघन और अनसुलझी शिकायतें भी अपवाद हैं। ऐसी स्थिति न होने की पुष्टि के लिए स्वघोषणा देनी है।

SOP, खंड 10।

शुल्क पूछने से पहले इकाई के पत्राचार और मामले का रिकॉर्ड देखें। सुधार का काम शुरू होने से लंबित नोटिस अपने आप समाप्त नहीं होता। इसी तरह शिकायत सुलझने की मौखिक जानकारी को औपचारिक निस्तारण न मानें। स्थिति स्पष्ट न हो तो घोषणा करने से पहले सक्षम प्राधिकारी से स्पष्टीकरण लें और उसका रिकॉर्ड रखें।

इसका अर्थ सामान्य सहमति आवेदन रोक देने की सलाह नहीं है। सामान्य आवेदन प्रक्रिया और इस विशेष सुविधा की पात्रता अलग प्रश्न हैं। किसी इकाई के न्यायिक आदेश या उसके व्यक्तिगत मामले पर निष्कर्ष निकालने के लिए वास्तविक दस्तावेज पढ़ने होंगे।

सूची में नाम और वर्तमान नियुक्ति अलग बातें हैं

खंड 4 में चौदह संस्थानों का उल्लेख है और उनके साथ UPPCB के समझौता ज्ञापन, यानी MoU, की व्यवस्था दी गई है। उदाहरणों में IIT Kanpur, IIT Delhi, IIT Roorkee, IIT (BHU), CSIR-NEERI, MNNIT Prayagraj, Aligarh Muslim University और Central Pulp & Paper Research Institute शामिल हैं। SOP, खंड 4।

यह SOP की सूची है। इससे यह साबित नहीं होता कि हर संस्था आज हर प्रकार का काम स्वीकार कर रही है। संस्था चुनने से पहले उसका सक्रिय UPPCB समझौता, संबंधित कार्य का दायरा, संपर्क अधिकारी और जरूरी परीक्षण करने की क्षमता की पुष्टि करें। यह पुष्टि आवेदन के रिकॉर्ड के साथ रखें, ताकि बाद में रिपोर्ट की स्वीकार्यता पर अस्पष्टता न रहे।

सामान्य पर्यावरण परामर्श, किसी प्रयोगशाला की मान्यता या शैक्षणिक प्रतिष्ठा को इस योजना की नियुक्ति के बराबर न मानें। प्रमाणन निर्धारित संस्थागत मार्ग से होना चाहिए। यहाँ वर्तमान में उपलब्ध नियुक्तियों की सत्यापित निर्देशिका प्रस्तुत नहीं की गई है।

उद्योग और संस्था की जिम्मेदारियाँ अलग हैं

उद्योग सीधे सूचीबद्ध TPI से प्रमाणन का अनुरोध करता है और संबंधित क्षेत्रीय UPPCB कार्यालय को पहले लिखित सूचना देता है। संस्था को भुगतान भी सीधे किया जाता है। आवेदन में अन्य जरूरी दस्तावेजों के साथ तृतीय-पक्ष रिपोर्ट अपलोड होती है। इसके अतिरिक्त, स्थल निरीक्षण शुरू करने से पहले TPI को क्षेत्रीय कार्यालय को लिखित जानकारी देनी होती है।

SOP, खंड 5, 7 और 8।

इन दोनों सूचनाओं का अंतर समझें। संस्था को भेजा गया काम का ईमेल जरूरी नहीं कि बोर्ड को उद्योग की सूचना भी हो। उद्योग का पत्र भेज देने से संस्था की अलग सूचना की जिम्मेदारी भी अपने आप पूरी नहीं होती। जहाँ उपलब्ध हों, प्राप्ति की पुष्टि या पत्र पहुँचने का अन्य प्रमाण सुरक्षित रखें।

TPI को बोर्ड के निर्धारित प्रारूप में स्थल पर सत्यापन करना है। पहले की सहमति, उसकी शर्तें, प्रक्रिया का विवरण, उत्पादन, प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था और निगरानी के रिकॉर्ड तैयार रखें। संस्था को कागज पर लिखे नाम के बजाय वास्तविक संयंत्र की स्थिति समझनी चाहिए। तैयारी का यह क्रम लेख का व्यावहारिक सुझाव है; बोर्ड की चेकलिस्ट का विकल्प नहीं है।

नमूनों की जाँच कहाँ होगी, पहले तय करें

खंड 6 में स्पष्ट शर्त है कि नमूनों का विश्लेषण केवल TPI की अपनी आंतरिक प्रयोगशाला में होगा। इस प्रक्रिया में बाहरी प्रयोगशाला से विश्लेषण की अनुमति नहीं है। परीक्षण रिपोर्ट प्रमाणन रिपोर्ट के साथ दी जानी है और संबंधित क्षेत्रीय अधिकारी को प्रति भेजनी है। नमूना लेने, संभालने, ले जाने और उसकी स्थिति सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी खंड 7 में भी है।

SOP, खंड 6–7।

काम तय करने से पहले प्रयोगशाला की व्यवस्था पूछें। किसी बाहरी प्रयोगशाला की सामान्य मान्यता के आधार पर यह न मान लें कि उसकी रिपोर्ट इस विशेष शर्त को पूरा करती है। यहाँ प्रश्न केवल परीक्षण का परिणाम नहीं, बल्कि SOP के अनुसार परीक्षण होने का भी है।

तैयारी की चर्चा में यह स्पष्ट करें कि कौन से नमूने जरूरी हैं, कहाँ लिए जाएँगे और संयंत्र की उस समय की परिचालन स्थिति कैसे दर्ज होगी। परीक्षण परिणामों और अंतिम अनुपालन निष्कर्षों का संबंध दिखाई देना चाहिए। निरीक्षण के बाद केवल एक संलग्नक जुटाना पर्याप्त तैयारी नहीं है।

दस और बीस दिन का अर्थ क्या है?

खंड 7 में जहाँ अपशिष्ट जल और उत्सर्जन के नमूने लेने की जरूरत नहीं है, वहाँ प्रमाणित रिपोर्ट दस दिन में देने का प्रावधान है। नमूना और विश्लेषण होने पर अवधि बीस दिन है। ये संस्था की रिपोर्ट प्रस्तुत करने की अवधियाँ हैं। इन्हें UPPCB से उतने ही दिनों में CTE, CTO या CCA मिलने की गारंटी न लिखें।

इस खंड में अवधि की शुरुआत का अलग बिंदु और कार्यदिवस की परिभाषा स्पष्ट नहीं दी गई है। इसलिए दोनों बातें अपनी ओर से जोड़कर आधिकारिक नियम के रूप में प्रस्तुत न करें। संस्था और संबंधित कार्यालय से समय-सारणी स्पष्ट करें, लेकिन आपसी कार्य-समझौते तथा SOP के शब्दों को अलग रखें।

योजना बनाते समय नियुक्ति, निरीक्षण, परीक्षण, रिपोर्ट, आवेदन की जाँच और प्राधिकारी के निर्णय को अलग चरण मानें। केवल पहला अनुरोध भेजने की तारीख से गिनने पर पूरी प्रक्रिया की स्थिति स्पष्ट नहीं होगी।

छह महीने की वैधता निरीक्षण से शुरू होती है

खंड 9 के अनुसार प्रमाणन रिपोर्ट निरीक्षण की तारीख से छह महीने वैध है। यह अवधि रिपोर्ट पर हस्ताक्षर, भुगतान या आवेदन अपलोड होने से शुरू नहीं होती। SOP, खंड 9।

निरीक्षण की तारीख रिकॉर्ड में स्पष्ट रखें और उसी हिसाब से आवेदन की तैयारी करें। आवेदन देर से जमा होना हो या निरीक्षण के बाद संयंत्र में बदलाव आए तो रिपोर्ट की उपयुक्तता दोबारा पूछें। नया प्रेषण पत्र पुराने सत्यापन की तारीख नहीं बदलता। रिकॉर्ड का अंतर छिपाने के लिए तारीख बदलना समाधान नहीं है।

रिपोर्ट और सहमति की वैधता अलग विषय हैं। छह महीने वाली रिपोर्ट इस प्रक्रिया का सहायक प्रमाण है, छह महीने का संचालन लाइसेंस नहीं। दूसरी ओर, सहमति की निरंतर वैधता से पुरानी निरीक्षण रिपोर्ट नए या बदले आवेदन के लिए हमेशा उपयोगी नहीं हो जाती।

शुल्क और नियामक नियंत्रण अलग रखें

खंड 5 में उद्योग और संस्था के बीच वित्तीय शर्तें आपसी सहमति से तय होती हैं। इस लेनदेन में UPPCB का वित्तीय हस्तक्षेप नहीं है। उस खंड में सभी काम के लिए एक समान रुपये की दर नहीं दी गई है। शुल्क और काम का दायरा स्पष्ट करें तथा संस्था के भुगतान को लागू सहमति शुल्क से अलग रखें।

बोर्ड की निगरानी बनी रहती है। खंड 11 में सामान्यतः रिपोर्ट के आधार पर कार्यवाही है, लेकिन अपवाद वाले मामलों में अधिकारी भौतिक निरीक्षण कर सकते हैं और कारण दर्ज करेंगे। बोर्ड रिपोर्टों का पुनः सत्यापन भी कर सकता है। खंड 12 में गलत या भ्रामक रिपोर्ट, प्रमाणित शिकायतें और लगातार देर या खराब गुणवत्ता के आधार पर संस्था का MoU समाप्त करने की व्यवस्था है।

गंभीर उल्लंघन में काली सूची संभव है।

TPI अपने स्तर पर निरीक्षण शुरू नहीं कर सकती, औचक निरीक्षण नहीं कर सकती और उद्योग के विरुद्ध कानूनी या बलपूर्वक कार्रवाई नहीं कर सकती। उसकी सत्यापन भूमिका को बोर्ड की नियामक शक्ति के बराबर न समझें। प्रमाणन को आगे की जाँच से सुरक्षा के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।

जनवरी 2026 के बदलाव क्यों जरूरी हैं?

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 23 जनवरी 2026 की G.S.R. 62(E) और 63(E), प्रकाशित 27 जनवरी, से वायु तथा जल सहमति दिशानिर्देश बदले। इनमें पंजीकृत पर्यावरण अंकेक्षक (Registered Environment Auditor) की परिभाषा Environment Audit Rules, 2025 से जुड़ी है और निर्दिष्ट स्थल भ्रमण तथा सत्यापन की भूमिका दी गई है। वायु संशोधन; जल संशोधन।

संस्था का SOP में नाम होने और राष्ट्रीय अंकेक्षक व्यवस्था में पंजीकरण का रिकॉर्ड अलग रखें। एक होने से दूसरा अपने आप साबित नहीं होता। इसी तरह जनवरी का संशोधन पढ़कर राज्य SOP वापस ले लिए जाने का निष्कर्ष न निकालें। संबंधित काम के लिए कौन सी प्रक्रिया और योग्यता लागू है, यह स्पष्ट करना जरूरी है।

केंद्रीय CTO ढाँचे में अब निरस्तीकरण तक निरंतर वैधता है, जबकि पाँच से पच्चीस वर्ष की अवधि का शुल्क प्रावधान बना है। लागू राज्य क्रियान्वयन और वास्तविक सहमति रिकॉर्ड साथ जाँचें। पुरानी अनुमति की समस्या अपने आप समाप्त न मानें। इस बदलाव से SOP की छह महीने वाली रिपोर्ट स्थायी नहीं हो जाती।

अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्र में पात्र सूक्ष्म और लघु इकाइयों के लिए स्वप्रमाणित Form I पर CTE मानी जाने का अलग प्रावधान भी है। यह सभी MSME या सभी Orange और Green इकाइयों की सामान्य छूट नहीं है। इसे स्वतः प्राप्त CTO या पर्यावरणीय स्वीकृति भी न समझें।

वर्तमान पोर्टल की सूचना पढ़कर आवेदन करें

Invest UP के निवेश मित्र 3.0 संबंधी आधिकारिक विवरण में भी CTE और CTO के तृतीय-पक्ष प्रमाणन को राज्य के सुधारों में शामिल किया गया है। इससे वर्तमान नीति का संदर्भ मिलता है; यह सामान्य विवरण SOP की विस्तृत पात्रता और सत्यापन की शर्तों का विकल्प नहीं है। आधिकारिक सुधार विवरण।

उत्तर प्रदेश का आधिकारिक सहमति पोर्टल आवेदन और पंजीकरण के लिए निवेश मित्र बताता है। निवेश मित्र की वर्तमान सूचना के अनुसार, जरूरी सेवा संस्करण 3.0 में उपलब्ध न हो तो 2.0 का उपयोग करें। पहले से 2.0 में जमा आवेदनों पर आगे काम करने का निर्देश भी है। हर सहमति सेवा अपने आप नए संस्करण में चली गई है, यह न मानें।

UP OCMMS; निवेश मित्र।

आवेदन संख्या, अपलोड की गई रिपोर्ट, सहायक दस्तावेज और बाद की आपत्तियों के उत्तर सुरक्षित रखें। SOP का प्रमाणन दायरा बताए गए जल अधिनियम, वायु अधिनियम और खतरनाक अपशिष्ट नियमों के अनुपालन का है। यह अलग Environmental Clearance (EC) का निर्णय नहीं है। अन्य लागू स्वीकृतियों के अपने दस्तावेज चाहिए।

दस्तावेजी तैयारी के लिए अंग्रेजी लेख EC अनुपालन प्रस्तुतियों में सामान्य कमियाँ देखें। अन्य नियामक लेख हिंदी ज्ञान केंद्र में हैं। ये जानकारी के साधन हैं; इस SOP में किसी इकाई की पात्रता का व्यक्तिगत निर्णय नहीं देते।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. क्या Orange और Green उद्योगों के लिए यह प्रमाणन अनिवार्य है?

नहीं। SOP में यह विकल्प है और सामान्य आवेदन मार्ग उपलब्ध है। पहले इकाई की श्रेणी, बताए गए अपवाद और संस्था की वर्तमान व्यवस्था जाँचें। केवल Orange या Green नाम होने से पूरी पात्रता साबित नहीं होती।

2. कारण बताओ नोटिस वाली इकाई इस सुविधा का उपयोग कर सकती है?

खंड 10 में UPPCB या CPCB के कारण बताओ अथवा बंदी आदेश के अधीन उद्योग बाहर हैं। अन्य अपवाद भी साथ देखें। सुधार शुरू होने से नोटिस का लंबित रिकॉर्ड समाप्त न मानें। घोषणा से पहले सक्षम स्पष्टीकरण प्राप्त करें।

3. क्या तृतीय-पक्ष रिपोर्ट संचालन की अनुमति है?

नहीं। रिपोर्ट बोर्ड की कार्यवाही में सहायक है, बोर्ड का सहमति निर्णय नहीं। वास्तविक सहमति और उसकी लागू शर्तें देखें। आवेदन की रसीद, निरीक्षण या अनुकूल रिपोर्ट को संचालन की अनुमति प्राप्त होने के रूप में प्रस्तुत न करें।

4. क्या नमूने किसी भी मान्य बाहरी प्रयोगशाला में भेज सकते हैं?

इस SOP की व्यवस्था में नहीं। इसमें TPI की आंतरिक प्रयोगशाला जरूरी है और बाहरी विश्लेषण प्रतिबंधित है। संस्था चुनने से पहले उसकी क्षमता पूछें। सामान्य प्रयोगशाला मान्यता इस विशेष शर्त का विकल्प नहीं है।

5. क्या दस या बीस दिन में स्वीकृति की गारंटी है?

नहीं। ये नमूने और विश्लेषण के अनुसार TPI की प्रमाणित रिपोर्ट की अवधियाँ हैं, बोर्ड के निर्णय की गारंटी नहीं। खंड में कार्यदिवस या अवधि शुरू होने का अलग बिंदु भी स्पष्ट नहीं है; अपनी ओर से न जोड़ें।

6. रिपोर्ट की छह महीने की वैधता कब शुरू होती है?

निरीक्षण की तारीख से। रिपोर्ट बाद में जारी होने से अवधि फिर शुरू नहीं होती। आवेदन में देरी या निरीक्षित संयंत्र में बदलाव होने पर उपयुक्तता जाँचें। इसे CTO की वैधता के समान न समझें।

7. तृतीय-पक्ष रिपोर्ट के बाद भी UPPCB निरीक्षण कर सकता है?

हाँ। अपवाद में कारण सहित भौतिक निरीक्षण और रिपोर्टों के पुनः सत्यापन का अधिकार बना है। यह मार्ग प्रक्रिया का एक चरण सरल करता है; लंबित उल्लंघन दूर करने, निगरानी समाप्त करने या स्वीकृति की गारंटी देने वाला साधन नहीं है।

जानकारी की जाँच: 16 अक्टूबर 2026, 09:12 बजे IST।

मूल दस्तावेज: PDF और आधिकारिक पोर्टल

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